अपनी बात कहने आए किसान लगभग पिछले 50 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं।
किसानों के नाम पर भाजपा अपने अरबपति मित्रों को फायदा पहुंचाने वाले काले कानून लेकर आई है। भाजपा सरकार ने कोर्ट और कई अन्य जगहों पर झूठ बोला कि इन कानूनों को लाने के पहले किसानों से बातचीत की गई थी। जबकि सच्चाई यह है कि इन कानूनों को लाने से पहले किसानों से कोई भी सलाह - मशविरा नहीं किया गया था।
भाजपा सरकार ने संसद में भी बिना चर्चा के सत्ता का बुलडोजर चलाकर इन कानूनों को पास कर दिया।
इस बार भी संसद सत्र नहीं हुआ और कृषि कानूनों पर कोई चर्चा नहीं हो सकी।
आखिर क्या कारण हैं कि भाजपा सरकार बिना चर्चा के, बिना किसानों की आवाज सुने इन कृषि कानूनों को किसानों पर थोपना चाहती है।
60 से ऊपर किसानों की इस आंदोलन में जान जा चुकी है। हजारों किसान व उनके परिवार अपनी खेती बचाने के संकल्प के साथ आन्दोलन में उतरे हैं।
भाजपा सोचती है कि किसानों एवं इन कानूनों के बारे में झूठ फैलाकर वो इन कानूनों को लागू कर लेगी। किसानों के लिए बने कानूनों पर किसानों की ही बात नहीं सुनी जा रही है।
लेकिन किसानों के दृढ़ संकल्प के आगे भाजपा की क्रूरता की हार होना तय है।
कांग्रेस पार्टी पूरी दृढ़ता के साथ किसानों के साथ खड़ी है।
जय किसान।
#SpeakUpForKisanAdhikar
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