Thursday, January 21, 2021

Dynast नहीं, भारत का अभिमान हैं राहुल!

Dynast नहीं, भारत का अभिमान हैं राहुल!

खून बहाकर सत्ता के शिखर पर खड़े हो जाना ये वक़्त की तवारीखों में आमबात रही है, किंतु आने वाली नस्लों को सम्मान वही देते हैं जो उसूलों के लिए कुर्सी ठुकराते हैं। कांग्रेस के पास एक ऐसी ही ताक़त है जो यक़ीनन किसी अन्य दल के पास नहीं है, वह है "राहुल गांधी"आमजन को कांग्रेस से तमाम शिकवे-गिले हो सकते हैं, लेकिन गत दिनों राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके मुंह से ये वाक्य सुनकर मैं स्तब्ध रह गया, मेरा मन भावनाओं के समंदर में हिलकोरे मार रहा था, उन्होंने कहा कि - "वे मुझे डरा नहीं सकते, मुझे छू नहीं सकते, हाँ मुझे गोली ज़रूर मार सकते हैं। लेकिन मैं इनसे डरता नहीं, चाहे पूरा हिन्दुस्तान एक तरफ खड़ा हो, लेकिन दूसरी तरफ मैं सच को थामे अकेला खड़ा रहूँगा"। याद है ऐसी ही कुछ आशंका श्रीमती सोनिया गांधी जी ने अपने पति स्व राजीव जी के लिए ज़ाहिर की थी, श्रीमती इंदिरा गांधी के साथ भी तो यही हुआ था, इंटेलिजेंस की खबर थी कि आप अपने सुरक्षा दस्ते से सिक्ख सुरक्षाकर्मियों को हटा दीजिये, उस वक़्त इंदिरा जी ने कहा "Are not we secular? कमोबेश इंदिरा जी ने तो अपनी मौत की आशंका भी ज़ाहिर कर दी थी।सच का रास्ता पथरीला है और उस पर चलते जाने का फ़ैसला भी राहुल का ही है, हालांकि इन रास्तों में आने वाले खतरों से भी वे भली-भांति परिचित हैं, शायद इन्हीं कुछ वजहों से वे कांग्रेस में अलग थलग पड़ जाते हैं, हो सकता है उनकी पराजय का कारण भी यही हो। बहरहाल, जब दिमाग को ट्रैप कर लिया हो गया हो, तो वही चीज़ें दिखाई देंगी जो जालसाज आपको दिखाना चाहता हो, आप राहुल को लाख नज़रंदाज़ करें, कितना ही मज़ाक बना लें, लेकिन हक़ीक़त यही है कि आप राहुल को नहीं अपने आने वाले कल को नज़रंदाज़ कर रहे हैं। राहुल को "फीनिक्स" हैं, राख बनकर फिर खड़े हो जाएंगे लेकिन उनकी बातों को नज़रंदाज़ करके आप खुद के लिए खतरा मोल ले रहे हैं। गाँधी और नेहरू को आत्मसात किए व्यक्ति के लिए पर्वत से भी भिड़ जाने का माद्दा होता है, और बापू का यही "अहिंसा का पाठ" राहुल का हथियार है और नेहरू जी का यही "वैज्ञानिक दृष्टिकोण" राहुल की सोच के विद्यमान है।मैं फिर दोहराता हूँ, कांग्रेस में तमाम खामियां होंगी, संगठन से जुड़ी तमाम विपदाएं होंगी, घात-प्रतिघात होंगे लेकिन कांग्रेस के पास एक ऐसी ही ताक़त है जो यक़ीनन किसी अन्य दल के पास नहीं है, वह है "राहुल गांधी"। यही अंतिम सत्य है कि राहुल भविष्य हैं, राहुल ही भारत की राजनीति के ध्रुव हैं, राहुल ही इस देश की अभिव्यक्ति हैं।

Dynast नहीं, भारत का अभिमान हैं राहुल!

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